वादियाँ

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वादियाँ

कितनी हसीन है ये वादियाँ,
जी करता है डूब जाऊँ इसमें,
खो जाऊँ इसमें, बह जाऊँ इसमें।

वो बच्चों की खिलखिलाहट,
पंछियों की ये चहक,
इन आँखों की मासूमियत,
वो किसानों की मेहनत।

ये गेहूँ की खड़ी बालियाँ,
ये धान की झुकी बालियाँ,
ये मक्कों की शानो शौकत
और सरसों की शर्मीली मिजाज।

कितनी हसीन है ये वादियाँ,
जी करता है डूब जाऊँ इसमें,
खो जाऊँ इसमें, बह जाऊँ इसमें।।

यहाँ के भोजन का स्वाद,
यहाँ के लोगों का अपनापन।
तन पर सादगी का साज
और खेतों में सुन्दर फसल का राज़।

मिट्टी की सौंधी सी खुशबू,
पेड़ो की छांव में ठंडक।
साँझ हुई तो गपशप सबकी
और रात हुई तो घनघोर खामोशी।

कितनी हसीन है ये वादियाँ,
जी करता है डूब जाऊँ इसमें,
खो जाऊँ इसमें, बह जाऊँ इसमें।।

धन्यवाद!

 

Written by- Bikram Kumar Mandal

वक़्त का खेल – The mighty gamer

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वक़्त का खेल

कल भी इसी का था,
आज भी इसी का है।
ये वक़्त का खेल है,
आगे भी इसी का रहेगा।

आज इसने रुलाया है,
कल यहीं हसायेगा,
क्या पता, आगे क्या होगा?
ये राज़ वक़्त ने छिपाया है।

जिसका कल तक सब कुछ था,
आज उसका एक कतरा नहीं है,
कल जिसकी उंगली पकड़ता था,
आज वो चेहरा जचता नहीं है।

जो अपने थे
अब पराये हो गए,
कहानी बदल गई फिरसे,
इस वक़्त के साये में।

धन्यवाद!

 

Written by- Bikram Kumar Mandal