वक़्त का खेल – The mighty gamer

Watch the video on YouTube

वक़्त का खेल

कल भी इसी का था,
आज भी इसी का है।
ये वक़्त का खेल है,
आगे भी इसी का रहेगा।

आज इसने रुलाया है,
कल यहीं हसायेगा,
क्या पता, आगे क्या होगा?
ये राज़ वक़्त ने छिपाया है।

जिसका कल तक सब कुछ था,
आज उसका एक कतरा नहीं है,
कल जिसकी उंगली पकड़ता था,
आज वो चेहरा जचता नहीं है।

जो अपने थे
अब पराये हो गए,
कहानी बदल गई फिरसे,
इस वक़्त के साये में।

धन्यवाद!

 

Written by- Bikram Kumar Mandal

 

Leave a Comment